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Camera से जुड़ी सभी जानकारी

आज मैं आपको स्मार्ट फोन के कैमरा की सभी जानकारी देने वाला हूं, मैं जो है आपको स्मार्ट फोन और DSLR के कैमरा के जुड़ी सभी जानकारी पूरी विस्तार में समझा कर बताने वाला हूं। आज हम बातें करेंगे कि स्मार्ट फोन के कैमरे की जानकारी और कैमरे में क्या होता है? और अगर आपको अच्छी फोटो स्मार्टफोन की मदद से निकालना है तो आपको इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आपको में स्मार्ट Smart Phone Camera VS DSLR Camera में क्या अंतर है? दोनों के बारे में पूरे विस्तार से इस पोस्ट में समझाने वाला हूं।


Megapixel Kya Hota Hai?

 मेगापिक्सल यानी कि आप जब कोई भी फोटो लेते हो और उस फोटो को बहुत ज्यादा जूम करते हो, तो वहां पर आपको छोटे-छोटे बॉक्स दिखाई देंगे वह सब pixels होते हैं और एक मेगापिक्सल में 10 लाख पिक्सेल होते हैं, 10लाख  पिक्सेल को मिलाकर ही एक मेगापिक्सल बनता है। मेगापिक्सल यानी कि आपके फोन में जो कैमेरा होता है, वहा पर बहुत सारे सेंसस होते हैं और सब में आखिर में जो Sensor होता है, उस पर बहुत सारे छोटे छोटे Pixels होते हैं और उसी Pixels को मेगापिक्सल कहा जाता है। यानी कि जितने ज्यादा मेगापिक्सल होगा उतना ही ज्यादा आपके फोन के कैमरा का Lens बड़ा होगा।

 अगर सरल भाषा में कहीं तो, Camera से निकाले जाने वाली फोटो को दर्शाने का काम यह Megapixel का होता है, यानी कि बहुत सारे छोटे छोटे पिक्सेल को मिलाकर 1 मेगापिक्सल बनाया जाता है और उसी तरीके के और मेगापिक्सल को मिलाकर फोटो उत्पादित होती है।


ISP Kya Hota Hai?

ISP यानी की Image Signal Processing है, यानी कि जब कैमरे से फोटो निकाली जाती है उसके बाद जो डिजिटल डाटा यह ISP के पास भेजा जाता है, उसके बाद ISP उसे फोटो में से नॉइस रिडक्शन, ब्यूटी, नाइट मोड़ और एल्गोरिदम यह सभी को प्रोसेस करने का काम Image Signal Processing करता है। 

 अगर आपको अच्छी फोटो चाहिए तो आपके फोन में ISP अच्छा होना चाहिए, ISP यह आपके प्रोसेसर में आता है आपके फोन का जितना अच्छा प्रोसेसर होगा उतना ही अच्छा आपका Image Signal Processing होगा और उतनी ही अच्छी आपकी फोटो निकलती है।


Aperture Kya Hota Hai?

 Aperture यानी कि कैमरे के ऊपर एक छोटा सा छेद होता है उस छेद का साइज यह Aperture होता है, यानी कि वह छेद का साइज जितना बड़ा होगा उतनी ज्यादा लाइट आपके कैमरे के सेंसर तक जाएगी और इतनी अच्छी फोटो आपको मिलेगी, अगर कैमरे का Aperture कम है तो लाइट आपके सेंसर तक कम जाएगी और फोटो की क्वालिटी आपको अच्छी नहीं मिलेगी। Aperture को हम F में मापते हैं, जितना F की वैल्यू कम होगा उतना ही वह छेद का साइज बड़ा होगा और फोटो अच्छी निकलेगी। अगर F का वैल्यू ज्यादा होगा तो छेद का साइज कम होगा और फ़ोटो खराब आएगी । 

( EX- F 1.4 = छेद का साइज बड़ा होगा और फोटो ब्राइट निकलेगी /

         F 8.0 = छेद का साइज कम होगा और फ़ोटो डार्क आएगी )


Shutter Speed Kya Hai?

 Shutter स्पीड क्या होता है? Shutter स्पीड यानी कि हर कैमरे में एक शटर होता है, जिसके खुलने से लेकर बंद होने तक के स्पीड को Shutter स्पीड कहा जाता है। शटर स्पीड यह मोशन को कंट्रोल करती है और इसी के साथ-साथ शटर स्पीड लाइट भी कंट्रोल करने में थोड़ी मदद करती है। Shutter स्पीड का उपयोग ज्यादातर मूवमेंट वाले फोटो में किया जाता है, अगर आपको अपने फोटो में मूवमेंट को फास्ट बताना है तो आपको शटर स्पीड कम रखना है और अगर आपको अपने फोटो में मूवमेंट को स्टेबल बताना है तो आपको शटर स्पीड ज्यादा रखना है। 


Optical Zoom / Digital Zoom / Hybrid Zoom Kya Hai?

  Optical Zoom यानी की कैमरे के अंदर एक लेंस होता है जो आगे-पीछे होकर फोटो जूम करने में मदद करता है, उसे हम ऑप्टिकल जूम कहते हैं। यह काम पूरा हार्डवेयर का होता है, ऑप्टिकल जूम से आपकी फोटो की क्वालिटी कम नहीं होगी अगर आपने ऑप्टिकल जूम करके फोटो निकाली तो आपके फोटो की क्वालिटी कम नहीं होगी वह उतनी ही रहेगी जितनी जूम करने से पहले थी।

 Digital Zoom यानी कि इसमें किसी भी प्रकार की Zoom नहीं किया जाता है, यहां पर फोटो को क्रॉप किया जाता है उसे जी डीजल झूम कहा जाता है, यानी कि फोटो निकालकर उसे सॉफ्टवेयर के जरिये क्रॉप करके आपको दिखाया जाता है उसी को ही डिजिटल जून कहते हैं। डिजिटल जूम से आपके फोटो की क्वालिटी बहुत कम हो जाती है और फट जाती है।

 Hybrid Zoom यानी कि इसमें ऑप्टिकल जूम और डिजिटल जूम का मिक्सचर होता है, यानी कि इसमें जो है थोड़ा ऑप्टिकल जूम और डिजिटल जूम को मिलाकर फोटो को जूम किया जाता है इससे भी आपके फ़ोटो की क्वालिटी थोड़ी सी कम हो जाती है, लेकिन डिजिटल जूम से अच्छी क्वालिटी आपको Hybrid Zoom मिलती है।


ISO Kya Hai?

 ISO यानी कि यह आपके फोटो में लाइट को कंट्रोल करने का काम करता है, ISO कम होगी तो उतनी ही कम आपके फोटो में लाइट रहेगी और जितना ISO ज्यादा रहेगा उतनी ही आपकी फोटो में लाइट ज्यादा रहेगी। इसकी मदद से आप कम लाइट में अच्छे फोटो निकाल सकते हो लेकिन यहां पर आपको नॉइस ज्यादा देखने के लिए मिलेगा।


EIS / OIS Kya Hai?

 EIS यानी कि इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबलाइजेशन यानी कि अगर आप कोई वीडियो निकालते हो, तो आपकी वीडियो बहुत ज्यादा अन्स्टेबल हो जाती है, इसी को कम करने के लिए ESI काम करता है, ESI एक सॉफ्टवेयर बेस्ट होता है, यानी कि यह आपके वीडियो को डिजिटली क्रॉप कर देता है और आपको स्टेबल वीडियो देता है, जिससे आपकी वीडियो वह कम ही ने वाली दिखाई देगी लेकिन यह सॉफ्टवेयर के ऊपर होता है।

 OIS यानी कि ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन यानी कि अन्स्टेबल वीडियो को कम करने के लिए OIS काम करता है, OIS एक हार्डवेयर बेस्ट होता है, यानी कि यह आपके वीडियो हार्डवेयर के मदत से स्टेबल रखने की कोशिश करता है और आपको स्टेबल वीडियो देता है यह हार्डवेयर के ऊपर बेस होने के कारण वीडियो अच्छी स्टेबल मिलती है।


Bokeh Mode -

 Bokeh मोड यानी कि आपका जो सब्जेक्ट होता है वह फोकस में होता है और बाकी सब ब्लर हो जाता है, यानी कि आप जिसे भी सिलेक्ट करोगे वह क्लियर दिखाई देगा और पीछे का बैकग्राउंड रहता है वह सब ब्लर और स्मूद हो जाएगा जिससे जो है फोटो बहुत ही अच्छी लगती है। 


AI Mode -

 AI Mode यानी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मोड होता है, जो Algorithm से पता करता है कि आप किसकी फोटो निकाल रहे हो और किसके लिए कौन सा इफेक्ट आपके लिए सही रहेगा यह सभी AI का काम होता है। अलग-अलग चीजों के फोटो के लिए अलग-अलग इफेक्ट होते है उन इफेक्ट को बताने का काम AI करता है।


Night Mode -

 Night Mode यानी कि सॉफ्टवेयर के जरिए फोटो के डार्क पिक्सेल को ब्राइट करना इसे नाईट मोड कहा जाता है, यानी कि एल्गोरिदम के जरिए फोटो के अंदर जितने भी डार्क पिक्सेल होते हैं उन सब को ब्राइट किया जाने का काम यह नाइट मोड में होता है।


HDR Mode -

 HDR का फुल फॉर्म हाई डायनेमिक रेंज होता है, यानी कि सॉफ्टवेयर की मदद से 3 तरह ( हाई एक्सपोज, अंडर एक्सपोज और नॉर्मल ) के फोटो निकाले जाते हैं और उन तीनों फोटो को मिलाकर एक अच्छी क्वालिटी वाली फोटो बनाई जाती है  इसी को HDR मोड कहा जाता है। 


Slow Motion / Time Laps -

 स्लो मोशन यानी कि जब हम नॉर्मल वीडियो निकालते हैं तब 1 सेकेंड में  30 फ्रेम आते हैं और वही स्लो मोशन में 1 सेकंड में 240 फ्रेम आते हैं और इसी को 30 फ्रेम/सेकंड (30 फ्रेम पर सेकेंड) करके आपको बताया जाता है, यानी कि जो आपको एक सेकंड में दिखता है उसका ही आपको 8 या 9 सेकंड करके बताया जाता है।

 Time Laps यानी कि स्लो मोशन उल्टा होता है, नॉर्मल हम वीडियो निकालते हैं तो 1 सेकंड में 30 फ्रेम मिलते हैं और हम टाइम लेफ्ट में निकालेंगे तो हमें एक सेकंड में एक ही फ्रेम देखने के लिए मिलेगा यानी कि जो वीडियो 5 से 6 सेकंड का आपने लिया था वह सिर्फ एक ही सेकंड में दिखाई देगा।


Smart Phone Camera VS DSLR Camera -

 बात करें DSLR के कैमरे के बारे में तो DSLR का सेंसर बड़ा होने के कारण ज्यादा लाइट को सेंसर लेता है और फोटो की क्वालिटी अच्छी आती है। इसी के साथ डीएसएलआर कैमरा में बहुत सारे हार्डवेयर का यूज किया जाता है, फोटो को निकालने के लिए डीएसएलआर कैमरे में अलग-अलग लेंस भी आते हैं जो अच्छे फोटो निकालने के लिए मदद करते हैं।

  बात करे स्मार्टफोन के कैमरे के बारे में तो भी स्मार्ट फोन के कैमरा का सेंसर बहुत ही छोटा होता है, लेकिन उसका मेगापिक्सेल बहुत ज्यादा होता है। स्मार्टफोन में फ़ोटो निकलने के लिए ज्यादातर सॉफ्टवेयर के यूज करके प्रक्रिया की जाती है, इसके वजह से फोटो की क्वालिटी वह DSLR के मुकाबले कम आती है।


Conclusion -

 आज मैंने इस पोस्ट में आपको कैमरा से जुड़ी सभी जानकारी बता दी है जैसे कि मैंने आपको स्मार्टफोन के कैमरे और डीएसएलआर के कैमरे के बारे में सब कुछ बता दिया है। सभी लोगों को पता होगा कि डीएसएलआर कैमरे के फोटो स्मार्टफोन के मुकाबले बहुत अच्छी होती है, इसका भी जवाब इस पोस्ट में मैंने आपको बता दिया है। अगर आपको और कुछ जानकारी हासिल करनी है तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हो या फिर आप हमसे संपर्क कर सकते हो।

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